आजकल भारत की राजनीति में हर जगह सिर्फ एक ही चर्चा है, ‘G RAM G‘ बिल। संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होने की कगार पर है, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच की जंग और तेज हो गई है। आधी रात को जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब राज्यसभा में इस ऐतिहासिक और विवादास्पद बिल को पास कर दिया गया। लेकिन आखिर इस बिल में ऐसा क्या है कि विपक्ष रातभर संसद परिसर में धरने पर बैठा रहा? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है यह ‘G RAM G’ बिल?
‘G RAM G’ (Viksit Bharat – Gramin Rozgar Aur Mazbooti Guarantee) बिल 2025, सरकार का एक महत्वाकांक्षी कदम है। सरल शब्दों में कहें तो यह ‘मनरेगा’ (MGNREGA) का नया और आधुनिक रूप है।
G RAM G बिल की मुख्य बातें:
- काम की गारंटी: अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 की जगह 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी।
- डिजिटल पेमेंट: मजदूरी का भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड खातों में होगा ताकि भ्रष्टाचार कम हो।
- स्किल ट्रेनिंग: इसमें सिर्फ शारीरिक श्रम ही नहीं, बल्कि युवाओं को तकनीकी कौशल (Skill Development) सिखाने का भी प्रावधान है।

हंगामे की वजह क्या है? विपक्ष का आरोप है कि G RAM G बिल के बहाने सरकार मनरेगा की पुरानी संरचना को खत्म कर रही है और राज्यों के अधिकारों में दखल दे रही है। सांसदों का कहना है कि डिजिटल अनिवार्यताओं की वजह से गरीब मजदूर इस सिस्टम से बाहर हो जाएंगे।
लोग क्या पूछ रहे हैं?
1. क्या इस बिल के आने से मनरेगा पूरी तरह खत्म हो जाएगा? सरकार का कहना है कि यह मनरेगा का “अपग्रेड” है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसके नियम और शर्तें पुराने मनरेगा से काफी अलग हैं, जिससे इसकी पहचान बदल जाएगी।
2. मजदूरों को इससे क्या फायदा होगा? मजदूरों को अब 25 दिन का अतिरिक्त काम मिलेगा और मजदूरी की दरों में भी महंगाई के हिसाब से बढ़ोतरी की गई है।
3. विपक्ष इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रहा है? विपक्ष का मुख्य विरोध “सेंट्रलाइजेशन” (केंद्रीकरण) को लेकर है। उनका मानना है कि फंड रिलीज करने की सारी शक्ति केंद्र के पास चली जाएगी, जिससे राज्य सरकारों की भूमिका कम हो जाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
‘G RAM G’ बिल भारत के ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता इसके लागू होने के तरीके पर निर्भर करती है। जहां सरकार इसे ‘विकसित भारत’ की ओर एक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे गरीबों के अधिकारों पर चोट मान रहा है। अब देखना यह होगा कि जमीन पर यह बिल मजदूरों की जिंदगी कितनी बदल पाता है।
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