Korean Kanakaraju Review: भारत में कोरियन फिल्मों और वेब सीरीज को लेकर लोगों के बीच काफी क्रेज है। कोरियन कहानी, वहां की संस्कृति और अलग तरह का सिनेमा भारतीय दर्शकों को काफी पसंद आता है। हालांकि, तेलुगु कमर्शियल सिनेमा में कोरियन थीम को जोड़कर फिल्म बनाने की कोशिश कम ही देखने को मिली है।
अब अभिनेता वरुण तेज फिल्म ‘Korean Kanakaraju’ के जरिए कुछ ऐसा ही नया प्रयोग लेकर आए हैं। फिल्म का निर्देशन मेरलपाका गांधी ने किया है, जो हल्की-फुल्की और मनोरंजक फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने अनंतपुर की देसी पृष्ठभूमि को कोरिया से जोड़ते हुए हॉरर-कॉमेडी कहानी तैयार की है।
लेकिन सवाल यह है कि आइडिया सुनने में जितना दिलचस्प है, क्या फिल्म पर्दे पर भी उतनी ही मजेदार लगती है?
क्या है Korean Kanakaraju की कहानी?
फिल्म की कहानी अनंतपुर जिले के पेनुकोंडा में रहने वाले कनकराजू (वरुण तेज) की है। वह गांव में अपनी जिंदगी मस्ती से जीता है और लकड़ी से जुड़े पारंपरिक खेल और प्रदर्शन करता है।
Korean Kanakaraju की जिंदगी में उस वक्त नया मोड़ आता है, जब उसे चैत्र (रितिका नायक) से प्यार हो जाता है। चैत्र किआ की फैक्ट्री में काम करती है और उसे कोरियन फिल्मों और संस्कृति में काफी दिलचस्पी है।
इसी बीच अचानक एक कोरियन आत्मा कनकराजू के शरीर में प्रवेश कर जाती है। आखिर यह आत्मा किसकी है? उसका अतीत क्या है? और वह कनकराजू के शरीर में क्यों आई है?
आत्मा से छुटकारा पाने की कोशिश में कनकराजू के सामने कई अजीब और मजेदार घटनाएं आती हैं। फिल्म की असली कहानी इसी सफर के इर्द-गिर्द घूमती है।
कोरियन आत्मा का आइडिया कैसा है?
फिल्म का मुख्य आइडिया सुनने में काफी दिलचस्प है। अनंतपुर का एक देसी लड़का और उसके शरीर में कोरिया की आत्मा का प्रवेश—यह कॉन्सेप्ट दर्शकों का ध्यान खींचता है।
लेकिन परेशानी यह है कि फिल्म का ट्रेलर ही कहानी का काफी हिस्सा पहले बता देता है। इसलिए सिनेमाघर में पहुंचने के बाद दर्शकों के पास कहानी को लेकर ज्यादा सरप्राइज नहीं बचता।
ऐसे में पूरी जिम्मेदारी फिल्म की स्क्रीनप्ले और ट्रीटमेंट पर आ जाती है। यहीं फिल्म थोड़ी कमजोर पड़ती दिखाई देती है।
अनंतपुर, किआ फैक्ट्री और कोरियन आत्मा का कॉम्बिनेशन नया जरूर लगता है, लेकिन कहानी में इस नए आइडिया को उसी स्तर का मजबूत ट्रीटमेंट नहीं मिल पाता।
पहला हाफ कैसा है?
फिल्म की शुरुआत कनकराजू के परिवार, गांव की जिंदगी और सुनील के किरदार के साथ उसकी दुश्मनी से होती है। सत्य की एंट्री के बाद कहानी में कॉमेडी का रंग आना शुरू होता है।
हालांकि फिल्म को मुख्य कहानी तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा समय लग जाता है। जिस घटना का दर्शकों को ट्रेलर में इंतजार रहता है, वह इंटरवल के आसपास जाकर सामने आती है।
कनकराजू के शरीर में आत्मा के प्रवेश वाला हिस्सा कुछ जगहों पर दिलचस्प है। बड़े भाई वाले किरदार में वरुण तेज की शुरुआत भी अच्छी लगती है, लेकिन बाद में इस भावनात्मक एंगल का उतना प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो पाता।
पहले भाग में दो गाने, कॉमेडी और कोरियन आत्मा के आने के बाद पैदा होने वाला हॉरर टच कुछ हिस्सों में मनोरंजन करता है।
Korean Kanakaraju: दूसरा हाफ क्यों कमजोर पड़ता है?
इंटरवल के बाद फिल्म तेजी से कोरियन आत्मा की कहानी को आगे बढ़ाती है। लेकिन इसके बाद कहानी की दिशा थोड़ी साफ नहीं रहती।
Korean Kanakaraju: कनकराजू और आत्मा दोनों के सामने कोई ऐसा मजबूत लक्ष्य नहीं दिखाई देता, जिससे कहानी लगातार दिलचस्प बनी रहे। इसी वजह से कुछ सीन ऐसे लगते हैं जैसे उन्हें सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने के लिए जोड़ा गया हो।
फिर भी सत्य की कॉमेडी फिल्म को संभालती रहती है। खासकर तांत्रिक पूजा वाला एपिसोड और क्लाइमेक्स से पहले के कुछ सीन हंसाने में कामयाब होते हैं।
हालांकि क्लाइमेक्स काफी ज्यादा ओवर-द-टॉप लगता है। खासकर ग्राफिक फाइट वाले सीन फिल्म की बाकी कहानी से पूरी तरह जुड़े हुए महसूस नहीं होते। कुछ जगह ऐसा लगता है जैसे अचानक किसी दूसरी फिल्म का हिस्सा शुरू हो गया हो।
वरुण तेज की एक्टिंग कैसी है?
वरुण तेज ने पहले F2 और F3 जैसी फिल्मों में अपनी कॉमेडी टाइमिंग दिखाई है। इस फिल्म में उन्हें कॉमेडी के साथ-साथ हॉरर और एक्शन करने का भी मौका मिला है।
उन्होंने अनंतपुर के देसी लड़के कनकराजू और कोरियन गैंगस्टर वाले शेड को अलग-अलग अंदाज में निभाने की कोशिश की है। खासकर अनंतपुर के लहजे को उन्होंने अच्छी तरह पकड़ा है।
हालांकि दोनों किरदारों की लिखावट और मजबूत होती तो वरुण तेज का प्रदर्शन और ज्यादा प्रभावशाली बन सकता था।
रितिका नायक और सत्य ने किया प्रभावित

Korean Kanakaraju: रितिका नायक ने चैत्र के किरदार में अच्छा काम किया है। वह स्क्रीन पर खूबसूरत नजर आती हैं और कोरिया से जुड़े हिस्सों में उनका किरदार काफी स्वाभाविक लगता है।
लेकिन फिल्म की असली ताकत सत्य हैं। कृष्णप्पा के किरदार में उन्हें हीरो के बराबर स्क्रीन स्पेस मिला है। उनकी कॉमेडी टाइमिंग कई जगह फिल्म की जान बन जाती है।
खासकर तांत्रिक पूजा, क्लाइमेक्स और कोरियन आत्मा से बातचीत वाले दृश्यों में सत्य दर्शकों को खूब हंसाते हैं।
मुरलीधर गौड़ भी अपने किरदार के जरिए कॉमेडी पैदा करने की कोशिश करते हैं। श्रीनिवास अवस्थी का किरदार कहानी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन उसमें भावनात्मक असर कम दिखाई देता है। वहीं सुनील की भूमिका काफी सीमित है।
Korean Kanakaraju: थमन का म्यूजिक और तकनीकी पक्ष
तकनीकी रूप से फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष थमन का बैकग्राउंड म्यूजिक है। कहानी जब अनंतपुर से कोरिया पहुंचती है और फिल्म का मूड कॉमेडी से हॉरर की तरफ बदलता है, तब थमन का संगीत इन बदलावों को अच्छी तरह सपोर्ट करता है।
फिल्म के गाने भी कमर्शियल सिनेमा के हिसाब से ठीक बैठते हैं।
कोरिया में शूट किए गए सीन्स फिल्म को एक अलग विजुअल फील देते हैं। इन हिस्सों में फिल्म की लोकेशन और विजुअल प्रेजेंटेशन अच्छा लगता है।
Korean Kanakaraju Review: देखें या नहीं?
‘Korean Kanakaraju’ का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका आइडिया है। अनंतपुर के एक लड़के के शरीर में कोरियन आत्मा का प्रवेश सुनने में काफी नया और मजेदार लगता है।
लेकिन इस अच्छे आइडिया को पर्दे पर उतारते समय मजबूत स्क्रीनप्ले और बेहतर इमोशनल कनेक्शन की कमी महसूस होती है। कहानी में कुछ नए और याद रहने वाले सीन होते तो फिल्म का असर काफी बेहतर हो सकता था।
फिर भी अगर आप बिना ज्यादा उम्मीद और लॉजिक की तलाश किए हल्की-फुल्की हॉरर कॉमेडी और मनोरंजन देखना चाहते हैं, तो ‘Korean Kanakaraju’ को एक बार देखा जा सकता है।
फाइनल वर्डिक्ट:
नया आइडिया अच्छा है, सत्य की कॉमेडी मजेदार है और वरुण तेज ने अपनी भूमिका में मेहनत की है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले फिल्म को पूरी तरह दमदार बनने से रोकता है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐/5
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